Mythology यह शब्द आप सभी ने सुना होगा। इसका हिंदी रूपांतर होता है मिथक। पाश्चात्य लेखकों ने यह शब्द हिन्दू धर्म से सम्बंधित पुस्तकों विशेष रूप से रामायण, महाभारत और पुराणों के लिए कल्पित किया था। उनका उद्देश्य बड़ा सुनियोजित था। हिन्दू युवाओं को भ्रमित कर उन्हें हिन्दू धर्म का विरोधी बना दे। जिससे वह या तो ईसाई बन जाये अथवा नास्तिक बन जाये। ईसाईयों ने अन्वेषण कर देखा तो पाया कि अगर वेदों के सत्य ज्ञान का प्रकाश हो गया तो सम्पूर्ण धरती से ईसाइयत ही मिट जाएगी। इसलिए उन्होंने छल का सहारा लिया। 

पहले उन्होंने सायण और महीधर के गलत वेद भाष्य को अंग्रेजी में प्रचारित कर वेदों के विषय में भ्रांतियों को जन्म दिया। 

फिर रामायण और महाभारत में करी गई मिलावट को प्रचारित किया जिससे भारतवासियों के मन में श्री राम और श्री कृष्ण के प्रति सम्मान न रहे। 

तीसरा पुराणों में से अमान्य एवं असंभव बातों को विशेष रूप से प्रचारित कर हिन्दू देवी-देवताओं का उपहास कर हिंदुओं को निरुत्तर करना आरम्भ कर दिया। स्वामी दयानंद विदेशियों के इस सुनियोजित छल को अपनी दूरदृष्टि से पहचान गए थे। उन्होंने सर्वप्रथम वेदों का प्राचीन ऋषियों की शैली पर भाष्य कर विदेशियों को उनके ज्ञान में बच्चा सिद्ध कर दिया। फिर रामायण, महाभारत और मनु स्मृति में मिलावट को सिद्ध कर केवल उनमें वेदों के अनुकूल एवं तर्कसंगत तथ्यों को स्वीकार करने का आवाहन किया। पुराणों को उन्होंने अनेक लेखकों द्वारा लिखित एवं वेद विरुद्ध सिद्ध कर हिंदुओं की भ्रांतियों को समाप्त करने का भगीरथ प्रयास किया। 
हालाँकि हिन्दू समाज स्वामी दयानंद के चिंतन को समझने के स्थान पर उनके प्रति वैर भाव में अधिक लगा रहा। इसका मुख्य कारण पण्डे-पुजारियों और धर्माचार्यों द्वारा प्रतिकार था। क्योंकि उन्हें लगता था कि उनकी दुकानदारी बंद हो जाएगी। मौलवियों और पादरियों से निष्पक्ष होने की अपेक्षा रखना असंभव था। आज भी यही द्वन्द चलता आ रहा है। हिन्दू समाज के बैरी आज भी उसी प्रकार से हिन्दू देवी देवताओं का उपहास करना अपना कर्त्तव्य समझते है। नीचे कुछ चित्र दिए जा रहे है जिनमें कैसे उपहास करते हुए दिखाया गया है। आप स्वयं देख लीजिये। कोई ईसाईयों और मुसलमानों के अंधविश्वाओं और मिथक मान्यताओं का उपहास करने का कभी प्रयास नहीं करता। क्योंकि वे दोनों संगठित एवं उग्रवादी है। हिंदुओं को समझना होगा कि जब तक वे संगठित, एक धर्म शास्त्र वेद को मानने वाले एवं जातिवाद को दूर नहीं करेंगे। उनका इसी प्रकार से उपहास बनाया जाता रहेगा।

अब सोचने की बारी आपकी है।

सलंग्न चित्र 

  1. श्री कृष्ण जी द्रौपदी के चीर हरण के समय अधिक लंबाई की साड़ी Myntra पर खोजते हुए। 


2. नारद मुनि विश्व भ्रमण के लिए indigo app पर हवाई जहाज की टिकट ढूंढते हुए 

3. वीर हनुमान अपनी सेल्फी instagram पर डालते हुए 


4. गणेश भगवान zomato पर मोदक प्रसाद ढूंढते हुए।