हिन्दू समाज का पतन का कारण…..

एक बार एक कसाई के पास उसका एक दोस्त उससे मिलने गया। वहाँ उसने देखा कि एक बड़े से पिंजरे नुमा घर में ढेर सारे बकरे कैद है। और आपस में बड़े ही मस्ती के साथ खेल रहे हैं। उस पिंजरे से वह कसाई एक एक करके बकरे को बाहर निकाल कर उसे काट रहा था। उनका मांस बेच रहा था। उस कसाई के दोस्त को यह नजारा बड़ा ही हैरान करने वाला लगा। सारे बकरे पिंजरे कि जाली के माध्यम से अपने साथी बकरे को एक एक करके कसाई के द्वारा कटते तो देख रहे थे फिर भी वे खुश लग रहे थे। एक दुसरे के साथ खेलने में मशगूल थे। दोस्त ने कसाई से पूछा कि भाई ऐसा क्यों है?  तो कसाई ने बताया कि मैंने हर बकरे को अकेले में उसके कान में कह दिया है कि , भाई मैं सारे बकरों को हलाल करूँगा। लेकिन तुम्हे छोड़ दूँगा। तुम्हे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा।  इसलिए तुम बिलकुल चिंता मुक्त हो कर खेलो और खुश रहो। और इसी वजह से ये सारे के सारे खुश है। किसी भी प्रकार का भय और विद्रोह कि भावना इनके मन में नही है।
आज कुछ इसी प्रकार की गलतफहमी हिन्दू समाज को हो गई है। ज्यादातर  हिंदुओं को ऐसा लगता है कि वे सुरक्षित है और सदा रहेंगे। इस व्यवस्था पर उनकी पकड़ है, पहुँच है, इस लिए बाकी लोगों को परेशानी होगी उन्हें कुछ नहीं होगा।  1947 में पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं को भागना पड़ा। तब भी भारत के हिंदुओं को लगा कि वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा। कश्मीर से हिन्दू पंडितों को भागना पड़ा। देश के हिंदुओं ने कुछ नहीं किया।  उन्हें लगा वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा। पूरा पूर्वोत्तर ईसाई बन गया। तब भी भारत के हिंदुओं को लगा कि वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा।

छत्तीसगढ़,झारखण्ड, राजस्थान, गुजरात के गरीब आदिवासी ईसाई बन गए। तब भी भारत के हिंदुओं को लगा कि वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा। पंजाब के मजहबी सिख और उत्तरांचल के पहाड़ी भी ईसाई बना दिए गए। तब भी भारत के हिंदुओं को लगा कि वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा। बंगाल और आसाम से हिंदुओं को बांग्लादेशी मुसलमानों ने अल्पसंख्यक कर दिया। तब भी हिंदुओं को लगा कि वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा। उत्तर प्रदेश के कैराना,शामली, मेरठ, संभल, बिजनोर, मुरादाबाद, सहारनपुर, देवबंद आदि मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में लव जिहाद और दंगों से हिंदुओं का जीना दुर्भर हो गया। तब भी  हिंदुओं को लगा कि वे सुरक्षित है। उनका कुछ नहीं होगा।
हिन्दू समाज की हालत उसी के देश में पिंजरे में बंद बकरे के जैसी है। जो दूसरे बकरे के हलाल होने पर खुश होता है।
पिछले 1200 वर्षों से हिन्दू समाज पहले मुसलमानों, फिर ईसाईयों से पिटता आया। फिर भी हिंदुओं को पता नहीं लग रहा। अगले कुछ दशकों में श्री राम और श्री कृष्ण की संतान अपने अस्तित्व को बचाने के लिए संघर्ष करेगी।
जातिवाद, भाषावाद, प्रांतवाद, धार्मिक अन्धविश्वास, गुरुडम, ऊँच-नीच के नाम पर विभाजित हिन्दू समाज को ईश्वर सदबुद्धि दे।