​सालों से मस्जिद में घूट रहा, मैं तुम्हारा भोलेनाथ हुँ ,

हिन्दुओं मैं ही तुम्हारा वाराणसी का काशी विश्वनाथ हुँ।
अयोध्या के फटे तंबू में पडा तुम्हारी नामर्दी का प्रमाण हुँ,

हिन्दुओं मैं वही बुराई का वध करनेवाला दशरथपुत्र राम हुँ।
दुष्ट कंस का संहारक मैं ही , मैं ही गीता का ज्ञान हुँ ,

हिन्दुओं मथुरा की मस्जिद में पड़ा मैं कृष्ण भगवान हुँ।
सालों पहले लोग कहते थे मै हिन्दुत्व का ताज हुँ,

आज अकबर के किले से घिरा हुवा मै तीर्थ प्रयाग हुँ।
कहने के लिए मैं तुम हिन्दुओं की भाग्य विधाता हुँ ,

आतंकीयों की गोलियों से छलनी हो रही मै वैष्णो माता हुँ।
कहते हो तुम की मैं हर हिन्दू का श्वास हुँ,

चीन के कदमों मे पडा मैं तीर्थ कैलाश हुँ।
नारों मे तो सुनता हुँ की मै हर हिन्दू के साथ हुँ,

बम बारुद से घायल पडा मैं जख्मी अमरनाथ हुँ।
क्या ९० करोड भी कम है भगवा की लाज बचाने को?

या तुमको शौक पडी है अपने घरमे आग लगाने को?
उठो,जागो और सर्वनाश या सर्वबलिदान से एक चुनो,

तुम अर्जुन की जैसी ललकार करो और धर्म युध्द की तैयारी करो,

तो अब शुरूआत श्री राम जन्मभुमी पर मंदिर से ही हो जाए।