भारतीय समाज और बाबा के अंधविश्वास।

This my Old blog but very intriguing and the hard hit on the reality of Hindu society . Must Read

Indian Indology - Truth beyond agitprop

यदि किसी समाज का आर्थिक विकास की अपेक्षाकृत बौद्धिक विकास न हो तो वह समाज अंधविश्वासों में और भी गहरे धंसता चला जाता है। फिर उस समाज में लोगों के अंधविश्वास का फायदा उठाकर अपना घर भरने वाले परजीवियों का साम्राज्य विकसित होने लगता है।

भारत के मामले में यही हुआ है। 90 के दशक में उदारीकरण के बाद मध्यम वर्ग के लोगों के जीवन स्तर में तेजी से सुधार हुआ। इससे पहले जहाँ टीवी, फ्रिज और स्कूटर जैसे सुख साधन कुछ खास लोगों की पहुंच में ही हुआ करते थे, फिर ये आम लोगों की पहुंच में भी आने लगे। जब लोगों की आमदनी बढ़ी तो उसके साथ ही बाजार भी तरह तरह के उत्पादों से पट गया। फिर स्वयं को एक दुसरे से श्रेष्ठ और साधन संपन्न दिखाने की होड़ शुरू हुयी। इस होड़ ने मध्यम वर्ग की शांत जिन्दगी में खलबली मचा दी। एक दौड़ शुरू हो…

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